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SHABAD...

Friday, January 25, 2013

ये जो गुरूर है न , ये बहुत फबता है तुमपे ....- (c) बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न"

ये जो गुरूर है न , ये बहुत फबता है तुमपे ....

बेवजह मुझे नज़रंदाज़ करता है।
इस अदा पे बड़ा वो नाज़ करता है।।

तल्खियाँ भर जाती है अशआर में।
नया ज़ख्म जब आवाज़ करता हैं।।

मैं चाहता हूँ अश्क टपकें लहू बनकर।
पर ये कद बड़ा ऐतराज़ करता है।।

तूफ़ान भटक जाते हैं रास्ते अपने।
शाही जब कभी परवाज़ करता है।।

मैं अपनी आदत से शिकस्त खाता हूँ।
बख्त तू मुझे बहुत नाराज़ करता है।।

- © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न"
posted by Desh Ratna at 2:25 PM

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