DESH RATNA <DESH RATNA.pageName/> | <DESH RATNA/>

SHABAD...

Friday, May 6, 2016

New message

06/05/2016 10:15:06 SA

idNg2SxRSHGG6clFOyuP6h8iJrwiA7xTAzlZEljgXSYdM2xB4zh20G9O6elYKSN1G26M sSDVdUQvLGf6kJ7LKRgvR6y5Q90CXZTH 4AEYRPMlMXvhlDz1PF0gISXRt47DUzI8GZ4X xWwzgxSOkFnDtAMtqrrqeSg8ps

-2801 -2802 -2803 -2804 -2805 -2806 -2807 -2808 -2809 -2810 -2811 -2812 -2813 -2814 -2815 -2816 -2817 -2818 -2819 -2820 -2821 -2822 -2823 -2824 -2825 -2826 -2827 -2828 -2829 -2830 -2831 -2832 -2833 -2834 -2835 -2836 -2837 -2838 -2839 -2840 -2841 -2842 -2843 -2844 -2845 -2846 -2847 -2848 -2849 -2850 -2851 -2852 -2853 -2854 -2855 -2856 -2857 -2858 -2859 -2860 -2861 -2862 -2863 -2864 -2865 -2866 -2867 -2868 -2869 -2870 -2871 -2872 -2873 -2874 -2875 -2876 -2877 -2878 -2879 -2880 -2881 -2882 -2883 -2884 -2885 -2886 -2887 -2888 -2889 -2890 -2891 -2892 -2893 -2894 -2895 -2896 -2897 -2898 -2899 -2900

posted by Desh Ratna at 8:45 AM 0 comments

Tuesday, March 24, 2015

शहर में सब होता है बस वक़्त नहीं होता.

शहर में सब होता है बस वक़्त नहीं होता.
अलकतरे वाले सड़क पे दरख़्त नहीं होता.

नया उसूल नये कानून नयी-नयी रिवायतें हैं.

स्कूल का मास्टर भी अब सख्त नहीं होता.

सारा बाज़ार खरीद लाते अपना घर सजाने को.

गर लुटने को ये दिल कमबख्त नहीं होता.

ये सिकंदर मिज़ाजी तो हादसों की दौलत है.

शाहजहानाबाद का हर फ़क़ीर बख्त नहीं होता. 

-- © बख़्त फ़क़ीरी 'देश रत्न'
posted by Desh Ratna at 7:25 AM 0 comments

मैं मर्द हूँ और मुझे अपने होने का गर्व है।

मैं मर्द हूँ और मुझे अपने होने का गर्व है।
मेरा बलात्कार करना बंद करो अब।
तुम्हारे आँचल में जगह हो तो मुझे पनाह दो।
मैं सालों से सोया नहीं तुम्हारी फिक्र में।
- © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "
(वर्ष 2012 की आखिरी नज़्म)
posted by Desh Ratna at 7:24 AM 0 comments

Ek Sher

बादशाह था बशीर हो गया.
सुना है वो फ़क़ीर हो गया..
-- © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "
posted by Desh Ratna at 7:23 AM 1 comments

मैं तुम्हें पाना नहीं अपनाना चाहता था।।

तुमसे पहले भी कई किरदार आकर चले गए।
मेरी दोशीजगी पे  हुस्न के धब्बे लगाकर चले गए।
तुम्हारी फितरत से तुम मजबूर हो।
और मेरी आदत से मैं।
पर इस लेन देन के सौदे के दरमयान
तुम ये समझ ही नहीं पाए -
मैं तुम्हें पाना नहीं अपनाना चाहता था।।
- © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न"
posted by Desh Ratna at 7:22 AM 0 comments

सच -- (c) बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न"

1.
अखबारों में नहीं छपते किस्से हमारे।

मेरी कहानी के सब किरदार सच्चे हैं।।
2.
कारवां मीलों पीछे छुट जाते हैं।


सच का सफ़र बहुत तनहा होता है।

3.
शहंशाहों से तकरार होती है।
सच की तबियत खुद्दार होती है।।

- © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न"

The above shers are  dedicated to the Bravest of Brave The Great Martyr Subhash Chandra Bose.


posted by Desh Ratna at 7:21 AM 0 comments

Monday, October 8, 2012

Main mehfooz hun.. - (c) बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "

Kahin sitaaron se jhulse khet.
Kahin chandni se jalte shehar.
Mere ghar mein andhera tha
Main mehfooz hun..
- © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "
posted by Desh Ratna at 7:26 PM 0 comments

Sunday, September 30, 2012

पोशाक की तरह यार बदलता हूँ.. लम्बी उड़ान के परिंदे शाखों पे घर नहीं बनाते..
posted by Desh Ratna at 11:13 PM 0 comments

बडे शहरों के अपने तर्क-ओ-तह्जीब होतें हैं.

बडे शहरों के अपने तर्क-ओ-तह्जीब होतें हैं.
समझ पाये तो अच्छा वर्ना अजीब होते हैं.

जिसे चाहोगे पास वो हमेशा दूर मिलेगा.
और अजीब अजीब लोग करीब होते हैं.

मेहफिलों के उसूल भी निराले हैं यहाँ .
झप्पियाँ देकर भी सब रकीब होते हैं.. - © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "
posted by Desh Ratna at 10:14 PM 0 comments

मेरी आँखों में खौफ़ नहीं मिलेगा.

मेरी आँखों में खौफ़ नहीं मिलेगा.

मेरा जिस्म आज भीगा है जो तुम देख पा रहे हो
हो सकता है कल ये गलने लगे और परसों सड़ जाये.
और मेरे सड़े जिस्म से बदबू आने लगे.
मुझे मालूम है ये जो मीडिया के कैमरे मुझे लगातार घूर रहे हैं.
ये मेरे सड़े जिस्म की नुमाइश करने ज़रूर आयेंगे.
तब तुम देखना --
मेरी चमरियों में शायद सिलवटें पड़ी होंगी.
पाव भर मांस बाहर लटकने लगा होगा.
मेरे नाख़ून का रंग सफ़ेद हो चुका होगा..
मेरे इस सफ़ेद रंग को गौर से देख लेना.
ये रंग मैं हर सियासतदार के कुर्ते पे छोड़ कर जाऊंगा.
और एक बात --
तुम्हें मेरे सिकुड़े जिस्म के झुर्रीदार चेहरे पे दो आँखें भी मिलेंगी..
और तब तुम देखोगे --
तुम्हें मेरी आँखों में खौफ़ नहीं मिलेगा.. - © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "
 
posted by Desh Ratna at 10:11 PM 0 comments

Dil khareed-farokh ki riwayat achhi lagi.-- (c) बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "

Dil khareed-farokh ki riwayat achhi lagi.
Dil mehnga mera ye shikayat achhi lagi.

Aapne baanta zism bachakar dil ko sambhalkar.
Sach kehta hun aapki ye kifayat achhi lagi.

Dil bechne ka hunar seekho miyan, ye baazar hai.
Buzurgon ki kahi ye hidayat achhi lagi.

Mera dil lauta diya tune bagair istemaal ke.
Khuda kasam aapki ye inayat achhi lagi..

-- © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "
posted by Desh Ratna at 10:08 PM 0 comments

Halal naa kar jhatke se maar de - -- (c) बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "

Halal naa kar jhatke se maar de
Aise kar qatl pal me sanwar de.

Qatl ki taarikh ka faisala ho chuka.
Nehla dhula puraane kapde utaar de.

Aakhiri tamanna aaj v pehli hi khwahish hai
Ik raat lipat jee bhar ke pyar de.

(To be contnd..) 
-- © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "
posted by Desh Ratna at 10:08 PM 0 comments

माँ के आँचल में संवर जाता हूँ - - (c) बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न " "Desh Ratna

जब भी छुट्टियों में घर जाता हूँ
माँ के आँचल में संवर जाता हूँ

आँगन की तुलसी को करता हूँ सलाम
लपेट के माटी मैं निखर जाता हूँ.

भूख मिटती है बागीचे में आम से.
नहाने को सुबह नहर जाता हूँ.

शहर के दोस्त बस चैट पे मिलते,
गाँव में दुश्मनों के भी घर जाता हूँ.

लौटने का दिन जब होता है मुक़रर 
रोती है माँ और ठहर जाता हूँ.

बाबूजी दे देते हैं बटुआ निकाल कर.
बख्त तभी पूरा का पूरा मर जाता हूँ.
.
-- © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "
posted by Desh Ratna at 10:06 PM 0 comments

मशरिक से मग़रिब कोई तलबगार नहीं मिलता

मशरिक से मग़रिब कोई तलबगार नहीं मिलता.
कांच मिलते हैं जंगार नहीं मिलता.
कद की नुमाइश किस्से करूँ ऐय बख्त
मुफलिस शहर में कोई शहरयार नहीं मिलता ..-- © बख्त फ़क़ीरी "देश रत्न "
posted by Desh Ratna at 9:26 PM 0 comments

Saturday, January 15, 2011

मर्यादा - Desh Ratna


लो आज मैंने तुम्हारा भी परित्याग कर दिया... मुझे मर्यादा के वरदान के साथ कठोरता का अभिशाप भी मिला है...
November 9, 2010 at 1:10pm

तुम्हें राम और रावण दोनों मुझमे ही नज़र आते थे....और रावण हमेशा मेरे राम पे हावी दीखता था.... और पूरी अयोध्या मर्यादा बन मेरे सामने खड़ी थी..
November 9, 2010 at 3:32pm
posted by Desh Ratna at 12:52 AM 0 comments

मेरे रोशन किये चरागा ने मेरा घर जलाया क्यूँ? - Desh Ratna

जब तुने बनाया हुस्न तो ये दिल बनाया क्यूँ?
मेरे रोशन किये चरागा ने मेरा घर जलाया क्यूँ?

रौशनी के जशन में उजालों का सबब उम्दा,
रौशनी की बारात में तीरगी को बुलाया क्यूँ?

अन्धेरें में सक्सियत गुमनाम ही सही,
सूरज ने फिर उगने का वादा निभाया क्यूँ?

उसे नागुज़र थी हमारी सोहरत शायद,
सेहरा की भीगी रेत से हवा ने मेरा नाम मिटाया क्यूँ?
(2003, Malviya Nagar)
posted by Desh Ratna at 12:48 AM 0 comments

Ek Geet - Desh Ratna

बरसों की ये रीत रही है कान्धा देते बेटे,
बाप दे रहे कान्धा बेटे अर्थी पे हैं लेते,
मांग में सिन्दूर नहीं है कोई नहीं कुंवारी,
सबके सब सहमी खड़ी हैं पहने उजली साड़ी,

रोते नहीं हैं बच्चे अब ना आँखों में हैं पानी,
अब कैसे कहें हम तुमको ये कहानी.
देख रहे थे नेता सारे देख रही सरकार,
सरकारी अफसर खड़े थे थी हाथों में तलवार...(2 be contnd)
posted by Desh Ratna at 12:46 AM 0 comments

फुर्सते-ज़ीस्त में हर कोई बेवफा मिला - Desh Ratna

मेरी बावाफाई का मुझे ये सिला मिला,
फुर्सते-ज़ीस्त में हर कोई बेवफा मिला.

मेरे दर्देदिल को बीच रस्ते नीलाम कर,
बता ऐय मेरे दोस्त तुझे क्या नफा मिला?

रास्तों पे अंजुमन में और मस्जिदों में भी,
जाने हर सक्श क्यूँ मुझे खफ़ा मिला .

जाके कहदो वाईज़ से वो मनाएं अपनी ख़ैर,
मुझे तो मैकदे में झूमता हुआ ख़ुदा मिला.

अपने जनाज़े के लिए चार काँधे ढूंढता,
मुझे हर सक्श से मेरा ही पता मिला ..
(2001, Faraday House, Patna)
posted by Desh Ratna at 12:42 AM 0 comments

आ मैं एक नया गान लिखूं मगध का स्वाभिमान लिखूं -- Desh Ratna


आ मैं एक नया गान लिखूं
मगध का स्वाभिमान लिखूं

चाणक्य का ऐलान
चंद्रगुप की शान लिखूं

अशोक का गौरव
बुद्ध का निर्वाण लिखूं

मुसलामानों की होली
हिन्दू का रमजान लिखूं

आ मैं एक नया गान लिखूं

दिनकर की हुंकार लिखूं
या उर्वसी का प्यार लिखूं

मैय्या सीता का त्याग लिखूं
या जनक का प्रताप लिखूं

आ मैं एक नया गान लिखूं
मगध का स्वाभिमान लिखूं (To be continued..)

____

आ मैं एक नया गान लिखूं,
मगध का स्वाभिमान लिखूं...
बिहार विधानसभा में सुशासन को अपना मत देकर एक नए स्वर्णिम समय का आलिंगन करते इस जनतंत्र को मेरा नमन...
November 26, 2010 at 12:11pm)
posted by Desh Ratna at 12:38 AM 0 comments

Saturday, January 1, 2011

धर्म युद्ध का संकल्प दोतरफा नहीं - मेरा है -- Desh Ratna


आज फिर गांडीव थाम लिया है भुजाओं में मैंने, और पाञ्चजन्य अधरों से लगाने ही वाला हूँ,
सुदर्शन भी मैं ही उठाऊंगा और कवच कुंडल की मांग भी मुझसे ही होगी
अंगूठा भी मेरा ही कटेगा और रिक्त गुरुपद की भरपाई भी मैं ही करूंगा..
पर इस बार चक्रवियुह की रचना नहीं करने दूंगा किसी द्रोण को .
और ना कोई शिखंडी का सहारा ले गंगापुत्र की हत्या कर पायेगा,
ना किसी जयद्रथ का वध सूरज की किरणों का मोहताज़ बनेगा,
और ना ही दुर्योधन के जंघाओं पे प्रहार कर कायरता का परिचय दूंगा..
धर्म युद्ध का संकल्प दोतरफा नहीं - मेरा है...
(वर्ष की पहली रचना- देश रत्न

Labels:

posted by Desh Ratna at 2:29 AM 0 comments

Monday, December 13, 2010

माई मुझे बसंती ओढा दे - Desh Ratna


माई मुझे बसंती ओढा दे
कालकूट का विष पिला दे,
छीन ले ये बंसी मुझसे,
पाञ्चजन्य मेरे हाथ थमा दे ..

रास मुझे अब रास ना आये,
मोरपखा न मुझे सोहाए
पैंजनिया अब तोड़ दे माई
सुदर्शन मेरे हाथ थमा दे..

Labels:

posted by Desh Ratna at 2:18 AM 0 comments

Friday, December 3, 2010

मैं हिन्दू तू मुसलमाँ - Desh Ratna




मैं हिन्दू तू मुसलमाँ, देखना
इस रहगुज़र से कोई इन्सां न गुजरने पाये..

Labels:

posted by Desh Ratna at 11:05 PM 0 comments

Thursday, December 2, 2010

वैचारिक मंथन - Desh Ratna


-





पुरानी मान्यताएं समाप्त हो रही हैं. पर नए मूल्यों का निर्माण करने में हम अभी भी असफल रहे हैं.
परिणाम ये हुआ है कि एक वर्ग संघर्ष देखने को मिलता है..
एक परीखा एक खाई एक दीवार सी बन गयी है इंसान और इंसान के दरमयान..
कहीं आंग्ल भाषा अव्वल और आधुनिक होने का पैमाना बन गाया है तो कहीं कीमती कपड़ों ने विचारों के लिबास को कौड़ी के मोल का भी नहीं छोड़ा है..
बानर से आदमी एक वीराम !
योगेश्वर से सारथी एक वीराम !
महामानव कब तैयार होगा ??

Labels:

posted by Desh Ratna at 7:37 PM 0 comments