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मौत - देश रत्न (Desh Ratna)

बीती रात कोई मर गया शायद, उजाला बस्ती में कफ़न का कार गया शायद . मौत उसके पीछे ना पड़ी थी, बेचारा ज़िन्दगी से डर गया शायद. नुमाइश को यूँ तो एक जिस्म रक्खा था, सुबह त़क वो भी सड़ गया शायाद. थककर ज़िन्दगी के रेलम-पेले से, सफ़ेद काप्दों में वो संवर गया शायद.. year - 2003 Malviya Nagar delhi सारे शेर मेरी तरह आवारा हैं....कद्रदानों से मुआफी की तलब है..

एक और गुस्ताख़ी - देश रत्न (Desh Ratna)

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जब तुने बनाया हुस्न तो ये दिल बनाया क्यूँ? मेरे रोशन किये चरागा ने मेरा घर जलाया क्यूँ? रौशनी के जशन में उजालों का सबब उम्दा, रौशनी की बारात में तीरगी को बुलाया क्यूँ? अन्धेरें में सक्सियत गुमनाम ही सही, सूरज ने फिर उगने का वादा निभाया क्यूँ? उसे नागुज़र थी हमारी सोहरत शायद, सेहरा की भीगी रेत से हवा ने मेरा नाम मिटाया क्यूँ?